प्राकृतिक वन उपवन में नये फल-फूल व पत्तियों के साथ नये वर्ष आने पर प्रकृति के प्रति आभार का पर्व है बाहा बोंगा: मुखिया चंद्रशेखर हेंब्रम 

कसमार प्रखंड के सोनहर में धूमधाम से मनाया गया बाहा बोंगा परब 

Kasmar (Bokaro) : कसमार प्रखंड के सोनपुरा पंचायत अंतर्गत संथाल आदिवासी बहुल गांव सोनहर में रविवार को जाहेर गढ़ सरना समिति की ओर से संथालियों द्वारा बाहा बोंगा परब मनाया गया। इस अवसर पर पवित्र जाहिर थान में नाइके बाबा के द्वारा सखुआ बाहा (साल फूल) अर्पित करते हुए नये ऋतु के आगमन का स्वागत किया‌। आसपास के वन उपवन में आ रहे नये हर-भरे फूल पतियों एवं कोपलों के प्रति प्रकृति का आभार जताया। 

वहीं जाहिर थान परिसर में बनाये गये आखड़ा में महिला-पुरुष पारंपरिक गीतों-नृत्यों के साथ नए जीवन का स्वागत किया। 

पारंपरिक संथाली सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय मुखिया चंद्रशेखर हेंब्रम ने फीता काट कर किया। इस अवसर पर मुखिया श्री हेंब्रम ने कहा कि

किसी समुदाय की पहचान तभी बरकरार रहती है जब उस समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा, रिति-रिवाज जीवित रहते हैं। संथाली समाज की पहचान उसकी प्रकृति से जुड़े बोंगा से है। ‘बाहा’ का अर्थ ‘फूल’ और ‘बोंगा’ का अर्थ ‘पूजा’ है। यह प्रकृति की पूजा और नवीनीकरण का प्रतीक है। यह सोहराई के बाद संथालियों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है, जो पारंपरिक नए साल की शुरुआत भी माना जाता है। सखुआ के पवित्र फूल को अपने कानों में और जुड़े में लगाते हैं। पारंपरिक मांदल और टामक की थाप पर सामूहिक नृत्य-गायन होता है।

 यह त्योहार भाई-चारे सामूहिक एकता और प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध को दर्शाता है। बाहा बोंगा प्रकृति फूल और नए साल के आगमन का जश्न है, जो आदिवासी समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। इस दौरान पंसस पुनम मरांडी, जाहेर गढ़ सरना समिति के अध्यक्ष मान रामचंद्र टूडू, मान संदीप मरांडी, मान लालकिशुन टुडू, मान शंकर मरांडी, मान मांझी बाबा नकुल मरांडी, वासुदेव मरांडी, गुलाम टुडू, जोग मांझी मान लक्ष्मण मुर्मू, मान राजेश टुडू एवं मान बृजलाल टुडू, नायके बाबा धनुलाल मरांडी समेत अन्य गणमान्य महिला पुरुष मौजूद थे। 

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