आगामी जनगणना में कुड़मि समाज को “जाति–कुड़मी” और “मातृभाषा–कुड़माली” दर्ज कराने की अपील
Bokaro/Petarwar : पेटरवार वन सभागार में गुरुवार को कुड़मी समाज की भाषा, संस्कृति एवं परंपरा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में कुड़मी समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. अमर कुमार चौधरी ने कहा कि कुड़मी कोई जाति नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से एक जनजाति है। उन्होंने कहा कि कुड़मी समाज की अपनी अलग भाषा, संस्कृति, रिति-रिवाज, लोकपरंपरा, लोकगीत-नृत्य और सामाजिक व्यवस्था है, जिसे संरक्षित एवं विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा कुड़माली से जोड़ना समय की मांग है। किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है, इसलिए सभी लोगों को इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कुड़माली भाषा के शिक्षा, सामाजिक गतिविधियों और पारिवारिक व्यवहार में अधिकाधिक उपयोग पर जोर दिया। साथ ही पारंपरिक लोकगीत, लोकनृत्य एवं रीति-रिवाजों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आगामी जनगणना में अपनी जाति “कुड़मी” तथा मातृभाषा “कुड़माली” दर्ज कराने की अपील भी की।
वहीं सुरेश बानुउआर ने कहा कि सरकारी दस्तावेजों एवं कुड़मी समाज की विशिष्ट जनजातीय विशेषताओं से स्पष्ट होता है कि कुड़मी समाज जनजातीय पहचान रखता है, बावजूद इसके अब तक सरकार ने इसे अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए समाज को संगठित होकर संघर्ष जारी रखना होगा।
वक्ताओं ने कहा कि कुड़मी समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परब-त्योहार, देव-भूता परंपरा, जन्म, विवाह एवं मृत्यु संस्कार के अलग नेग-नियम हैं, जो हिंदू वैदिक परंपराओं से भिन्न हैं। समाज की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए इन परंपराओं को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम को निरंजन महतो समेत अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। मौके पर विधायक प्रतिनिधि मुकेश महतो, पंचानन महतो, सविता रानी, कृष्णा महतो, प्रकाश महतो, शक्तिधर महतो, प्रहलाद महतो, गौरीशंकर महतो, मिथुन महतो, विष्णु चरण महतो, देवेंद्र महतो, पिंटू महतो, लालदेव महतो, भद्रू महतो, उमेश महतो, बेनी महतो, इन्द्रनाथ महतो, राजकुमार महतो, कपिल महतो, शिवचरण महतो, यदुनाथ महतो, अरबिंद महतो, चंद्रदेव महतो सहित सैकड़ों कुड़मी समाज के लोग उपस्थित थे।
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