करम डाली की छांव में किशोरियों ने लिया बाल विवाह मुक्त समाज का संकल्प

कसमार। झारखंड के पारंपरिक लोकपर्व करम परब के अवसर पर कसमार प्रखंड में इस बार आस्था और संस्कृति के साथ सामाजिक जागरूकता की भी मिसाल देखने को मिली। करम डाली को साक्षी मानकर विभिन्न गांवों की किशोरियों ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।

सहयोगिनी बोकारो के तत्वावधान में संचालित बाल विवाह मुक्त अभियान के तहत खैराचातर, हिसीम, केदला, सोनपुरा, पोंडा, गरी, पिरगुल समेत विभिन्न गांवों में करम पर्व के दौरान विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान किशोरी मंडली की सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए समाज को बाल विवाह के खिलाफ मजबूत संदेश दिया।

सोनपुरा, केदला, खैराचातर और पिरगुल के करम अखाड़ा परिसरों में सैकड़ों किशोरियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे न तो स्वयं बाल विवाह करेंगी और न ही अपने समाज में बाल विवाह होने देंगी। किशोरियों ने बाल विवाह के खिलाफ अपने परिवार और समुदाय को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।

करम पर्व के अंतिम दिन किशोरियों और ग्रामीण महिलाओं को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, बाल संरक्षण तथा बच्चों के कानूनी अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम के माध्यम से बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और व्यक्तिगत दुष्प्रभावों के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया।

सहयोगिनी की सचिव कल्याणी सागर ने कहा कि बाल विवाह बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर छीन लेता है। करम जैसे पारंपरिक और सामुदायिक पर्वों के माध्यम से लोगों को जागरूक करना सामाजिक बदलाव का प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोगिनी बोकारो के कार्यकर्ताओं के साथ संबंधित गांवों की किशोरी क्लब की सदस्यों और ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनमें मंजू देवी, कुमारी किरण, सूर्यमणि देवी, अंजली कुमारी, स्वाति प्रजापति, पायल कुमारी और संजना कुमारी सहित अन्य शामिल थीं।

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