“हजारों पौधों की परवरिश ने रची हरित क्रांति, बंजर सड़क बनी पर्यावरण संरक्षण की मिसाल”
जिस रास्ते पर कभी उड़ती थी धूल, आज वहां हरियाली का स्वागत द्वार खड़ा है
Hemant Mahto’Hindiyar’
Kasmar (Boakro) : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यदि यह सवाल पूछा जाए कि एक व्यक्ति प्रकृति संरक्षण के लिए कितना बड़ा बदलाव ला सकता है, तो इसका सबसे सुंदर जवाब बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित बगियारी गांव में मिलता है। यहां पर्यावरण प्रेमी #जगेश्वर_गोसाईं और उनके सहयोगी रांगामाटी निवासी #धनु_महतो ने अपने अथक प्रयासों से वह कर दिखाया है। भले ही, इस कार्य में सरकारी सहायता मिली है। लेकिन इन दोनों की जुनून, लगन, मेहनत और समर्पण को कमतर नहीं आंका जा सकता है।
कभी बगदा से मधुकरपुर तक जाने वाली सड़क के दोनों किनारों पर दूर-दूर तक हरियाली का नामोनिशान नहीं था। गर्मी के दिनों में राहगीरों को छांव तक नसीब नहीं होती थी। लेकिन वर्षों पहले जगेश्वर गोसाईं ने इस क्षेत्र को हरियाली की नई पहचान देने का संकल्प लिया। उनके इस अभियान में धनु महतो भी पूरे समर्पण के साथ जुड़ गए और दोनों ने मिलकर एक ऐसी हरित क्रांति की नींव रखी, जिसकी चर्चा आज पूरे क्षेत्र में होती है।
दोनों साथियों ने सड़क किनारे हजारों पौधे लगाए। पौधारोपण के बाद उन्हें यूं ही नहीं छोड़ दिया गया, बल्कि बच्चों की तरह उनकी देखभाल की गई। पौधों को पानी देना, पशुओं से उनकी सुरक्षा करना, नियमित निगरानी रखना और सूख चुके पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाना, बांस घेरान की मरम्मति करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। वर्षों की अथक मेहनत और समर्पण का परिणाम आज सबके सामने है।
बगदा से मधुकरपुर तक की सड़क अब हरियाली की एक जीवंत तस्वीर बन चुकी है। जहां कभी दोनों किनारों पर वीरानी और बंजरपन पसरा रहता था, वहीं आज वृक्षों की लंबी कतारें प्रकृति के उत्सव का एहसास कराती हैं। सड़क के दोनों ओर लहलहाते पेड़ न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि राहगीरों को छाया, स्वच्छ हवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं। यह सड़क आज पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की एक प्रेरक मिसाल बन गई है।
ग्रामीण बताते हैं कि जगेश्वर गोसाईं और धनु महतो ने केवल पेड़ नहीं लगाए, बल्कि लोगों के मन में पर्यावरण के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना भी जगाई है। उनके प्रयासों से प्रेरित होकर गांव और आसपास के क्षेत्रों के कई लोग पौधारोपण एवं संरक्षण अभियान से जुड़ने लगे हैं। आज बगदा, बगियारी, रांगामाटी, कुरको व मधुकरपुर और आसपास का इलाका हरियाली की पहचान बन चुका है।
जगेश्वर गोसाईं के पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी मिला है। उन्हें झारखंड स्थापना दिवस सहित कई सामाजिक और सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान वह संतोष है, जो पेड़ों की छांव में विश्राम करते राहगीरों और हरियाली से प्रसन्न ग्रामीणों के चेहरों पर दिखाई देता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर बगियारी की यह कहानी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि संकल्प मजबूत हो और कुछ लोग निस्वार्थ भाव से आगे बढ़ें, तो बंजर धरती को भी हरित धरोहर में बदला जा सकता है।
जगेश्वर गोसाईं और धनु महतो ने साबित कर दिया है कि विकास की असली पहचान केवल कंक्रीट की इमारतें नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोई गई हरियाली भी है। आज बगदा से मधुकरपुर तक फैली हरियाली उनकी वर्षों की तपस्या, समर्पण और प्रकृति प्रेम की जीवंत गवाही दे रही है।


