जैनामोड़ में हुई बोकारो जिला समिति की बैठक, मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कार्यकर्ताओं को कहा, आंदोलन के लिए कमर कसकर तैयार रहें ।
जैनामोड़ (बोकारो)। खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक (MMDR Amendment Bill), 2026 को लेकर झारखंड में सियासी विरोध तेज होने लगा है। रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की बोकारो जिला समिति की बैठक जैनामोड़ में जिला अध्यक्ष डॉ. रतन लाल मांझी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में केंद्र सरकार के इस विधेयक के झारखंड पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक, सामाजिक और संवैधानिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मुख्य रूप से मौजूद राज्य के पेयजल स्वच्छता एवं उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि MMDR Amendment Bill से खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड पर दूरगामी प्रभाव पड़ने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए राज्य सरकार की खनिज राजस्व और सेस तय करने की शक्ति सीमित की जा रही है। राज्य अपने संसाधनों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से सेस तय नहीं कर पाएगा और टैक्स एवं सेस से संबंधित अधिकार केंद्र के नियंत्रण में चले जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि झारखंड वर्षों से खनन के कारण विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण और जमीन से जुड़े संकट का सामना करता रहा है। ऐसे में यदि खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर राज्य की भूमिका कमजोर होती है तो इसका सीधा असर खनन प्रभावित स्थानीय लोगों के विकास और पूरे राज्य की कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की जमीन से निकलती है, लेकिन यदि उसके राजस्व और कराधान का अधिकार भी केंद्र के हाथों में चला जाएगा तो यह राज्य के हितों के साथ अन्याय होगा। राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का झारखंड मुक्ति मोर्चा पुरजोर विरोध करेगा।
योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में खनिज अधिकारों और उनसे जुड़े कराधान के संबंध में राज्यों के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा बहुमत के बल पर ऐसा कानून लाया गया है, जिसे झारखंड के हितों के लिए नुकसानदेह माना जा रहा है। उन्होंने इसे स्वीकार नहीं करने की बात कहते हुए कहा कि पार्टी सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि गांव-गांव जाकर लोगों को इस विधेयक के दुष्परिणामों से अवगत कराएं और जनआंदोलन को मजबूत करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय कमेटी के दिशा-निर्देश के अनुसार MMDR Amendment Bill के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा और केंद्र सरकार को इस कानून को वापस लेने के लिए बाध्य किया जाएगा।
बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक ने विधेयक से झारखंड के लोगों को होने वाले नफा-नुकसान को विस्तार से बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आंदोलन के लिए कमर कसकर तैयार रहने का आह्वान किया।
विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि झारखंड ने लंबी लड़ाई के बाद राज्य का दर्जा हासिल किया। इसके बाद सत्ता की लड़ाई भी लड़ी गई और जनता ने अपनी सरकार बनाई। लेकिन अब एक नई और सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों के अधिकार की है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य के पास अपने संसाधनों पर ही नियंत्रण नहीं रहेगा तो विकास की कल्पना अधूरी रह जाएगी।
उन्होंने कहा कि खनिज से मिलने वाला राजस्व ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार की रीढ़ है। यदि सेस और टैक्स तय करने का अधिकार केंद्र के पास चला गया तो झारखंड की विकास योजनाएं प्रभावित होंगी और स्थानीय जनता को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर इस “अधिकार छीनने की नीति” के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करने की अपील की।
बैठक में अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. रतन लाल मांझी ने की, जबकि संचालन मुकेश कुमार महतो ने किया।
मौके पर केंद्रीय सदस्य संतोष रजवार, मनोहर मुर्मू, मंटू यादव, राजू महतो, जयनारायण महतो, पूर्व जिला अध्यक्ष हीरालाल मांझी, अशोक मुर्मू सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
JMM का संदेश साफ—खनिज पर अधिकार और झारखंड के हित से समझौता नहीं
बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला कि MMDR Amendment Bill अब झारखंड में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है। JMM ने केंद्र के इस कदम के खिलाफ आंदोलन की जमीन तैयार करने का संकेत देते हुए कहा है कि “झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज पर झारखंड के हितों की अनदेखी किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।”


