पेटरवार की बाहुबला प्राइवेट लिमिटेड की ‘डबल मनी’ योजना पर उठे सवाल, स्टाम्प पेपर पर हो रहा Agreement!

 

Petarwar/Bokaro: पेटरवार क्षेत्र में बाहुबला प्राइवेट लिमिटेड की कथित ‘डबल मनी’ योजना को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस योजना में लोगों से एक निश्चित राशि ली जाती है और निर्धारित अवधि के बाद रकम को दोगुना लौटाने का दावा किया जाता है। खास बात यह है कि योजना में शामिल लाभुकों को स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट भी दिया जाता है।

 

स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट दिए जाने से लोगों में यह धारणा बन सकती है कि योजना पूरी तरह सरकारी मान्यता प्राप्त है। लेकिन कानूनी तौर पर केवल स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट होना किसी वित्तीय योजना को सरकारी अनुमति या नियामकीय मान्यता नहीं देता।

कंपनी रियल एस्टेट के रूप में दर्ज

सार्वजनिक कंपनी रिकॉर्ड के अनुसार Bahubala Private Limited का CIN U70100JH2022PTC018477 है। कंपनी का गठन 13 अप्रैल 2022 को हुआ था और यह ROC झारखंड के अंतर्गत पंजीकृत एक Private Limited Company है। उपलब्ध रिकॉर्ड में इसका मुख्य व्यवसाय Real Estate Activities / Real Estate and Renting बताया गया है। कंपनी की अधिकृत पूंजी ₹10 लाख और paid-up capital ₹1 लाख दर्ज है।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है—

अगर कंपनी का मुख्य कारोबार रियल एस्टेट है, तो लोगों से रकम लेकर उसे निश्चित अवधि में दोगुना करने की योजना किस कानूनी प्रावधान के तहत संचालित की जा रही है?

क्या यह बैंकिंग या निवेश योजना है?

कंपनी के नाम से Private Limited Company का पंजीकरण होना अलग बात है और जनता से धन स्वीकार करने की नियामकीय अनुमति अलग।

यदि किसी व्यक्ति से यह कहकर पैसा लिया जा रहा है कि निश्चित अवधि के बाद उसे दोगुनी रकम वापस मिलेगी, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि पैसा Deposit, Investment, Loan, Advance या किसी अन्य कानूनी व्यवस्था के तहत लिया जा रहा है। इसके लिए कंपनी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस योजना के संचालन के लिए उसके पास किस नियामक संस्था की अनुमति या पंजीकरण है।

RBI और SEBI की भूमिका पर भी सवाल

यदि गतिविधि वित्तीय जमा या NBFC गतिविधि के स्वरूप की है तो RBI से संबंधित नियमों का सवाल उठता है। वहीं यदि इसे निवेश योजना के रूप में संचालित किया जा रहा है तो SEBI के नियमन की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

अभी उपलब्ध सार्वजनिक कंपनी रिकॉर्ड में Bahubala Private Limited को RBI-registered NBFC या बैंक के रूप में प्रमाणित करने वाली जानकारी सामने नहीं आती। इसलिए कंपनी से यह स्पष्ट रूप से पूछा जाना चाहिए कि क्या उसके पास RBI का कोई Certificate of Registration है और क्या उसे जनता से इस प्रकार धन स्वीकार करने की अनुमति प्राप्त है।

स्टाम्प पेपर वाला एग्रीमेंट कितना महत्वपूर्ण?

इस पूरे मामले में एग्रीमेंट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकता है।

यदि एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि— “इतनी राशि प्राप्त की गई और निर्धारित समय के बाद इतनी राशि वापस की जाएगी” तो उस दस्तावेज से यह पता लगाया जा सकता है कि कंपनी स्वयं इस लेन-देन को किस रूप में परिभाषित कर रही है।

एग्रीमेंट यह भी देखा जाना जरूरी है कि उसमें:

– रकम लेने का उद्देश्य क्या बताया गया है?

– कितने समय में पैसा दोगुना करने की बात है?

– निश्चित रिटर्न की गारंटी किस आधार पर है?

– पैसा वापस नहीं होने पर क्या प्रावधान है?

– कंपनी किस कानून या सरकारी अनुमति का उल्लेख करती है?

– विवाद की स्थिति में किस न्यायालय का क्षेत्राधिकार बताया गया है?

BUDS Act की कसौटी पर भी जांच जरूरी:

भारत में Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019 लागू है, जिसका उद्देश्य अनियमित जमा योजनाओं पर रोक लगाना और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है।

इसलिए यदि किसी योजना में जनता से धन लिया जा रहा है और वह किसी मान्य नियामकीय व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आती, तो उसकी कानूनी स्थिति की जांच आवश्यक हो जाती है।

हालांकि, केवल ‘डबल मनी’ शब्द सुनकर Bahubala Private Limited को अनियमित जमा योजना चलाने वाली संस्था घोषित करना उचित नहीं होगा। इसके लिए Agreement, भुगतान की रसीद, योजना की शर्तें, कंपनी की वित्तीय फाइलिंग और संबंधित नियामक की अनुमति की जांच जरूरी है।

कंपनी से पूछे जाने चाहिए ये सवाल:

1. डबल मनी योजना किस कानून के तहत चल रही है?

2. लोगों से पैसा लेने के लिए किस सरकारी संस्था से अनुमति ली गई है?

3. क्या RBI से NBFC का Certificate of Registration प्राप्त है?

4. क्या कंपनी को Public Deposit लेने की अनुमति है?

5. क्या योजना के संबंध में SEBI से कोई पंजीकरण/अनुमति है?

6. लाभुकों से ली गई रकम कंपनी की Balance Sheet में किस मद में दिखाई जाती है?

7. पैसा दोगुना करने का आर्थिक मॉडल क्या है?

8. यदि कंपनी भुगतान करने में असफल रहती है तो लाभुकों की रकम की सुरक्षा की क्या व्यवस्था है?

9. स्टाम्प पेपर पर Agreement किस कानूनी प्रावधान के तहत बनाया जाता है?

10. अब तक इस योजना में कुल कितने लोगों से कितनी रकम ली गई है?

निष्कर्ष

Bahubala Private Limited का कंपनी के रूप में पंजीकरण मौजूद है और उपलब्ध रिकॉर्ड में कंपनी सक्रिय तथा रियल एस्टेट गतिविधियों से जुड़ी बताई गई है।

 

लेकिन कंपनी का पंजीकरण और जनता से पैसा लेकर उसे दोगुना करने की अनुमति—दो अलग-अलग विषय हैं।

इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि “Bahubala कंपनी असली है या नकली?”

बल्कि असली सवाल है—

“Bahubala की डबल मनी योजना को संचालित करने का कानूनी आधार क्या है और इसके लिए किस सरकारी नियामक से अनुमति ली गई है?”

यदि कंपनी के पास सभी आवश्यक अनुमति और नियामकीय दस्तावेज हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने से संदेह दूर हो सकता है। और यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं है, तो संबंधित सरकारी एजेंसियों द्वारा योजना की जांच जरूरी हो सकती है।

यह मामला जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

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