बरलंगा से कसमार भाया नेमरा पथ में सफ़र अभी भी टेड़ी खीर, कैबिनेट स्वीकृति की इंतजार में फोरेस्ट लैंड ट्रांसफर की फाईल फंसी है लैंड डिपार्टमेंट में

  • बोकारो जिले के जरीडीह अंचल के गायछंदा एवं रामगढ़ जिले के दुलमी अंचल के चामरोम मौजा में चिह्नित 86 एकड़ सरकारी भूमि किया जायेगा वन विभाग को हस्तांतरण, 55 हजार से अधिक करने होंगे क्षतिपूरक वृक्षारोपण .
  • बरलंगा-कसमार भाया नेमरा पथ निर्माण अंतर्गत बोकारो फारेस्ट डिविजन के चौड़ा एवं रामगढ़ डिविजन के हेठ बरगा एवं उपर बरगा मौजा में लगभग 40 एकड़ भूमि में कटेंगे 5 हजार से अधिक सखुआ आदि पेड़ 

Hemant Kumar Mahto

 KASMAR/BARLANGA : बरलंगा से कसमार भाया नेमरा स्टेट हाइवे का निर्माण का कार्य वन भूमि को छोड़कर शेष स्थानों पर पूर्ण हो चुका है। लेकिन आपको इस नवनिर्मित पथ में सफ़र करना अभी भी टेढ़ी खीर होगी। क्योंकि चौड़ा, हेठबरगा एवं उपरबरगा मौजा के बीच अंतर्गत वन भूमि (लगभग 4 किमी तक) निर्माण कार्य में पेंच फंसा हुआ है। जिसके कारण वन क्षेत्र में पथ निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। 

हालांकि इस परियोजना के तहत पथ निर्माण विभाग द्वारा लगभग 40 एकड़ वन भूमि अधिग्रहण के क्षतिपूरक के तहत पथ निर्माण विभाग द्वारा 86 एकड़ भूमि का हस्तांतरण वन विभाग को करने एवं क्षतिपूरक वृक्षारोपण कार्य के लिए कुल 8 करोड़ 43 लाख रूपये का भुगतान वन विभाग को पिछले 26 नवंबर 2025 को ही कर दिया है। इसके साथ ही प्रावधान के तहत पहला स्टेज का कार्य पुर्ण चूका है। 

लेकिन दूसरे स्टेज के तहत उक्त हस्तांतरित भूमि का मामला भू राजस्व एवं निबंधन विभाग झारखंड सरकार के पास प्रकियाधिन है। अब राज्य कैबिनेट से जितनी जल्दी उक्त प्रस्ताव का अनुमोदन होगा। उसके बाद ही वन विभाग की भूमि पर पथ निर्माण कार्य शुरू हो पायेगा। 

दरअसल, बोकारो जिले के कसमार प्रखंड चौक से चौड़ा गांव तक तथा रामगढ़ जिले के गोला-बरंगला चौक से रौरौ तक तो हाइवे निर्माण पूर्ण हो गया है। लेकिन दोनों जिलों के बीच स्थित जंगल पहाड़ का फोरेस्ट लैंड क्लिरियंस में हो रही देरी के कारण कार्य प्रारंभ नहीं पा रहा है। 

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार वन विभाग से पथ निर्माण विभाग को भूमि हस्तांतरण के लिए दो स्टेजों से होकर गुज़रना पड़ता है। जिसमें पहला स्टेज का कार्य तो हो चुका है। अंतिम एवं दूसरे स्टेज़ के तहत लैंड ट्रांसफर का कार्य राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झारखंड सरकार के पास प्रक्रियाधीन है। जिसमें भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 एवं धारा 29 के प्रावधान के तहत राज्य के मुख्य सचिव के द्वारा अधिग्रहित जमीन का प्रकृति बदलकर वन भूमि के रूप में निबंधित कर आरक्षित एवं संरक्षित घोषित करने संबंधी अधिसूचना जारी होगी। जैसे ही भू राजस्व विभाग भूमि का निबंधन कर वन विभाग को हस्तांतरण कर देगी, संबंधित कंस्ट्रशन कंपनी पथ निर्माण कार्य शुरू कर देगी।

चौड़ा से रौरौ-नेमरा के बाद हेटबरगा एवं उपरबरगा मौजा में लगभग 40 एकड़ वन भूमि अधिग्रहण के बदले पथ निर्माण विभाग को दो गुणी 86 एकड़ जमीन हस्तांतरित कर 10 गुणा की संख्या पौधरोपण करना होगा। इसके लिए पथ निर्माण विभाग द्वारा बोकारो जिले जरीडीह प्रखंड के अंतर्गत गायछंदा मौजा में 15 एकड़ जमीन एवं रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड अंतर्गत चामरोम मौजा में 71 एकड़ यानि कुल 86 एकड़ भूमि चिन्हित कर 25 जून 2025 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार को सौंपकर उक्त भूमि पर 10 गुणा क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए झारखंड सरकार वन विभाग को 8 करोड़ 43 लाख 61 हजार 148 रूपये का भुगतान भी कर चुकी है। यानि फर्स्ट स्टेज का कार्य हो चुका है। 

परियोजना तहत रामगढ़ वन प्रमंडल अंतर्गत उपर बरगा एवं हेठ बरगा मौजा में – 4657 तथा बोकारो वन प्रमंडल अंतर्गत चौड़ा मौजा में 878 यानि कुल 5535 पेड़ कटेंगे। जिसमें मुख्य रूप से सखुआ, भेलवा, बेहरा, केंद, पियार आदि पेड़ शामिल हैं। 10 गुणा यानि लगभग 55 हजार 350 वृक्षारोपण करना पड़ेगा।

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